Zindagi

Latest creations related to LIFE By Pratima Thakur.

Monday, 9 October 2017

मन

 
        कभी-कभी मन हो जाता है क्यों वाचाल

        करता है मुझसे यूंँ  ढ़ेरों सवाल ।

     
     
        क्या तेरा वजूद और क्या तेरी हस्ती

        रहे यूँ  बेखबर जैसे  छाई हो मस्ती ।


     
        बस चलता चले तू  रहे खुद से अंजान

        क्यों होता न तुझको  सच्चाई का भान ।


     
       क्यों खुद को बनाता है भीड़ का एक हिस्सा

        जो अब न थमा तो  ख़तम तेरा किस्सा  ।



        रब ने भेजा है तुझको  क्या बनने को धूल

        थोड़ा कर ले जतन  खुद की बन जा तू फूल ।



         बावरे मन ने कैसी  मचा दी हलचल

         दी ऐसी चुभन  खुद से हूँ मैं बेक़ल ।



         जाने दिल मेरा,  सच ही तो कहता है मन

         क्यों खुद को तू रोके है,   हो  के बेमन ।



          मन  मेरा  सच  में  है , एक  आईना

          देता है वो सीख , जो मिले जग में कहीं ना ।।


                                                        -प्रतिमा 


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Saturday, 7 October 2017

करवा चौथ का असल अभिप्राय

   
                 
                         दोस्तों, हमारा भारत देश त्योहारों का देश है। हमारे यहाँ हर मौसम का संबंध किसी न किसी व्रत और त्योहार से जुडा़ है। सदियों से इन व्रत, त्योहारों की परंपरा ने हमारी संस्कृति तथा सभ्यता को गौरवान्वित किया है। ये व्रत-त्योहार परिवार तथा संबंधों को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं।

                            दो दिन बाद करवा चौथ का व्रत है। कुछ दिनो पहले से ही बाज़ारों की रौनक देखने लायक  है। श्रंगार सामग्री की रेहड़ियों में भीड़  की रेलम-पेल है। मेंहदी लगाने वालों की तो चांदी होती है। ब्यूटी-पार्लरों  में तो पैर रखने की जगह नही होती, यहाँ एडवांस-बुकिंग से काम होता है।महंगे परिधानो और महंगे जेवरात खरीदने की उत्कंठा ज्यादातर हर ओर दिखाई देती है।

                              यदि हम इस व्रत की गहराई में जाते हैं तो यह मान्यता है कि यह सावित्री द्वारा यमराज से अपने पति के प्राणों की रक्षा हेतु किया गया अन्न-जल का त्याग था। हमारे देश में पति की भलाई एवं दीर्घायु होने के लिए कई अन्य व्रत भी किए जाते हैं, जैसे-तीज आदि परन्तु करवा चौथ व्रत पर बाजा़रीकरण का सर्वाधिक प्रभाव पड़ा है। इसकी प्रमुख वजह हमारी बॉलीवुड की फ़िल्मे हैं, इसमें इतना अधिक सौन्दर्यीकरण एवं भव्यता प्रदान किया जाता है ,जिसके प्रभाव से सामान्य आम-जन भी बाह्य आडंबर में खोकर अपने बजट के दायरे से बाहर चले जाते हैं।

                              अतः यह ज़रूरी है कि व्रत के महत्व को हृदय से महसूस किया जाए। सिर्फ दिखावे की गलाकाट प्रतियोगिता में न पड़कर तथा अपने बजट के दायरे में रहकर भी इस व्रत की खुशी को दोगुनी की जा सकती है। यह एक विचारणीय प्रश्न है कि जब पति एवं परिवार की भलाई  तथा सुख-शान्ति के लिए कई अन्य व्रत-त्योहार सन्तुलित खर्च के साथ मनाते हैं तो फिर करवा चौथ व्रत पर ही बाज़ारीकरण का सर्वाधिक प्रभाव क्यों है?
               
   ज़रा सोचिए....।

 आप सभी को करवा-चौथ की हार्दिक शुभ कामनाएँ।

                                                                                                          -प्रतिमा 


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Friday, 6 October 2017

मध्यम मार्ग ही सर्वश्रेष्ठ है।



                               दोस्तों मध्यम मार्ग की उपयोगिता आज के इस दौर में भी प्रासंगिक है।यह मार्ग "महात्मा बुद्ध" का दिया हुआ एक वरदान है,जिसके द्वारा हम आज के जीवन-चर्या मे भी अपनी कई समस्याओं का समाधान कर सकते हैं।
       

                                 यह मार्ग 'अति' व 'कमी' के मध्य की स्थिति को सुझाता है। किसी भी चीज़ की अति अच्छी नही मानी जाती अर्थात 'अति सर्वत्र वर्जयेत्'। कई बार जब इन्सान के पास धन अधिक हो जाता है तो सामान्यतः वह अभिमानी हो जाता है और अभिमान की स्थिति में नैतिकता की कमी हो जाती है,जो  एक मनुष्य के सन्तुलित विकास की प्रक्रिया में बाधक है।

                                जब मनुष्य के पास धन या ज्ञान की कमी होती है तब भी उसे अपने स्वाभिमान के साथ समझौता करना पड़ता है।
 
                                मध्यम मार्ग सच मे सुनहरी मार्ग है।यह इन्सान के व्यक्तित्व को सन्तुलन प्रदान करता है।इस स्थिति में वह निकृष्टता  से बेहतर स्थिति में होता है। वह तुलनात्मक रूप से सम्मानजनक  स्थिति में होता है साथ ही वह अपने से उच्चतर की ओर जाने के लिए प्रयासरत भी रहता है।परिवर्तन की यह स्थिति मानव के सहज स्वभाव व गतिशीलता की परिचायक है,अर्थात प्रकृति जो कि स्वयं चलायमान होती है और हम भी प्रकृति  के एक अभिन्न अंग ही तो हैं।

                           हमारे दैनिक जीवन में भी कई समस्याएं ऐसी आती हैं जब हम निर्णय नहीं ले पाते हैं कि हम 'हाँ' का साथ दें या 'नहीं' का। उस स्थिति में यदि हम अपने स्वभाव में लचीलापन अपनाते हुए हाँ तथा ना के मध्य की स्थिति को चुनते हैं तो त्वरितहोने वाले नुकसान से बच जाते हैं । अतः जीवन के किसी भी क्षेत्र में मध्यम मार्ग की उपयोगिता कारगर सिद्ध होतीहै।

                          जिस तरह सितार के तार को अधिक कस देने से या उसे ढ़ीला छोड़ देने की दोनों ही स्थिति में तार सही तरह से झंकृत नहीं होते जबकि संतुलन की स्थिति में सितार के तार का सुरीलापन कानों में मिश्री के रस घोल देता है।

                             किसी भी चीज़ की अति व कमी दोनों अच्छी नहीं होती जबकि संतुलन साधने से कई समस्याएं सुलझ जाती हैं।
     
              अतः मध्यम मार्ग सच में सुनहरी मार्ग है।

                                                                                      -प्रतिमा 


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Wednesday, 4 October 2017

कुदरत का कमाल




कल शाम छत पर खड़ी थी
                    मन में थी सवालों की कतार,


सूरज को कौन है गर्मी देता,
                    चंदा बदले नित कैसे आकार।


इन इंद्रधनुषी रंगों में
                    कौन फरिश्ता आकर है रंग भरता ,


इन कल-कल करते झरनों से,
                      कैसे झर-झर है पानी बहता।


किसने धरा को नभ की चादर ओढ़ाई,
                      और किसने ज़मीं  पे हरी चादर बिछाई।


क्यों वेग से आती है सागर की लहरें ,
                       किनारों पे आते ही क्यों थक के ठहरें।


पहाड़ों की होती क्यों अपनी ही शान,
                        युगों से खड़े हैं ये यूंँ  सीना तान ,




क्यों आसमां  में होता है पंछी का शोर,
                        क्यों वर्षा में नाचे पंख फैला के मोर।


इन पत्तों पे किसने ओस की बूँदें गिराईं ,
                         और किसने इन फूलों की बगिया बनाई।


हवाओं में घोला है किसने ये खुशबू ,
                          और किसने बिखेरा है रंगों  का जादू।


कैसे भू की तपन को ,
                           बरखा ठंडा कर जाए ।


कैसे दूर क्षितिज़ में ,
                           ज़मी-आसमां मिल जाए ।

                     
है कुदरत के किस्से अनोखे निराले,
                            इन गहरे भंवर से कोई कैसे पार पा ले।।



                                                          
                                                             -प्रतिमा 


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बेटी



आज रोशन हुई मन की हर एक जगह,
 रब ने दी है मुझे आज जीने की वजह।

 पुलकित है मन और झूमे है तन,
 नन्ही परी ने रखा जब से कदम।

 किलकारी लगे उसकी साज़ों की सरग़म,
 गूंजे ये आंगन चलती है जब छम-छम।

 दिखे मुझको उसमे जन्नत का वरदान,
 खिले मन की कलियाँ देती जब मुस्कान।

 बेटी तो है गौरव बेटी है अभिमान,
 फिर क्यों इसको समझे हो जैसे अपमान।

 दो उसको भी प्यार  दो उसको भी जीवन,
 संवारो उसे भी और  हो जाओ पावन।

 बेटी को जो समझे है  जीवन का बोझ,
 प्रभु कर दो उसकी  मति को निरोग।।
                    
                                             -प्रतिमा 


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Monday, 2 October 2017

आजकल



इन दिनो जाने ये क्या हो गया है,
दिल का सुकून औऱ चैन खो गया है।

यहाँ हर आदमी दिखे क्यों परेशान,
क्यों अपने ही छीने है अपनो का मान।

लालच के पीछे छोड़ी अपनी खुद्दारी,
फिर बचा न हमदर्द न बची उसकी यारी।

इन्सानियत का मोल बना कौड़ी का दाम,
फरेबों की भीड़ बचे कैसे ईमान।

जिधर देखूँ दिखता धुएं का गुबार,
मुख में है राम और बगल मे कटार।

शहर में मची है ये क्यों आपाधापी,
बढे धरती पे बोझ फिर धरती है काँपी।

इन पत्थरों के जंगल मे दिल भी बना पत्थर,
दया और रहम की न इनसे उम्मीद कर।

सोचूँ! काश आएंगे क्या ऐसे भी दिन,
चलेगी ये दुनिया इन बुराइयों के बिन।।
                                 
                                            -प्रतिमा 

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Sunday, 1 October 2017

My First Blog

Hey Guys,
I am Pratima here. Its my first blog so I will be posting here some of my new creations of hindi poetry,articles and short stories related with the experiences of life.
I hope you will like my stuffs and become a part of it.


                  "JEEVAN KE IS NAYE SAFAR MEIN SAATH KI GUZAARISH HAI,"
                                  "UMMEED HAI KI KARVAN CHAL HI PADEGA"